Verses on the Recognition of the Lord· 2.1 / 11

Verses on the Recognition of the Lord2.1

2.1
ननु स्वलक्षणाभासं ज्ञानम् एकं परं पुनः साभिलापं विकल्पाख्यं बहुधा नापि तद् द्वयम् ॥१॥
nanu svalakṣaṇābhāsaṃ jñānam ekaṃ paraṃ punaḥ sābhilāpaṃ vikalpākhyaṃ bahudhā nāpi tad dvayam
— ननु — निश्चय ही (आक्षेप का आरम्भ) ; — स्वलक्षण (विशेष) के रूप में प्रतिभासित ; — ज्ञान ; — एक (प्रकार का) ; — दूसरा (प्रकार) ; — फिर, दूसरी ओर ; — शब्द-सहित, सविकल्प ; — विकल्प नामक ; — अनेक प्रकार का, बहुविध ; — नहीं ; — भी, इसके अतिरिक्त ; — वह (ज्ञान) ; — द्वैत (ग्राह्य-ग्राहक का द्वैत)

(आक्षेप:) निश्चय ही ज्ञान एक प्रकार का है — स्वलक्षण (विशेष वस्तु) के रूप में प्रतिभासित होने वाला; दूसरा प्रकार, जो विकल्प कहलाता है, शब्द-सहित तथा अनेक प्रकार का है; और फिर भी वह ज्ञान (ग्राह्य-ग्राहक रूप) द्वैत-स्वरूप नहीं है।