— लोगों की, मनुष्यों के लिए; — अनायास (बिना अधिक प्रयत्न के) सिद्धि के लिए; — उदयाकर के पुत्र के द्वारा; — ईश्वर-प्रत्यभिज्ञा (यह ग्रन्थ); — यह; — उत्पल(देव) के द्वारा; — प्रतिपादित की गई, स्थापित की गई (भूत कृदन्त)
लोगों की अनायास (बिना अधिक प्रयत्न के) सिद्धि के लिए, उदयाकर के पुत्र उत्पल(देव) के द्वारा यह ईश्वर-प्रत्यभिज्ञा प्रतिपादित की गई है।