— दीर्घ, वृत्त (गोल), ऊर्ध्व, पुरुष, धूम, चान्दनता आदि (विशेषणों) से; — आभासों के अनुरूप; — भिन्न-भिन्न प्रतीत होते हैं (कर्मवाच्य, √भिद्+वि); — (स्वयं में) देश-काल से अभिन्न
दीर्घ, वृत्त (गोल), ऊर्ध्व (खड़ा), पुरुष, धूम, चान्दनता (चन्दन-पन) आदि (विशेषणों) के द्वारा आभासों के अनुरूप ही (वस्तुएँ) भिन्न-भिन्न प्रतीत होती हैं, यद्यपि (स्वयं में) देश-काल से अभिन्न हैं।