Verses on the Recognition of the Lord· 10.7 / 7

Verses on the Recognition of the Lord10.7

10.7
एवम् एवर्थसिद्धिः स्यान् मातुर् अर्थक्रियार्थिनः भेदाभेदवतार्थेन तेन न भ्रान्तिर् ईदृशी ॥७॥
evam evarthasiddhiḥ syān mātur arthakriyārthinaḥ bhedābhedavatārthena tena na bhrāntir īdṛśī
— इसी प्रकार ; — अर्थ-सिद्धि — प्रयोजन की सिद्धि ; — हो (विधि, √अस्) ; — प्रमाता के लिए ; — अर्थक्रिया के अभिलाषी (के लिए) ; — भेद-अभेद वाले (अर्थ) से ; — अर्थ (वस्तु) के द्वारा ; — इसलिए ; — नहीं ; — भ्रान्ति, भ्रम ; — ऐसी (विरोधी द्वारा कही गई) (प्रकार की)

इसी प्रकार अर्थक्रिया के अभिलाषी प्रमाता के लिए, भेद-अभेद वाले अर्थ के द्वारा, उसके प्रयोजन की सिद्धि होती है; इसलिए (विरोधी द्वारा कही गई) इस प्रकार की कोई भ्रान्ति नहीं है।