इदम् एतादृगित्येवं यद् वशाद् व्यवतिष्ठते
वस्तु प्रमाणं तत् सो ऽपि स्वाभासो ऽभिनवोदयः ॥१॥
idam etādṛgityevaṃ yad vaśād vyavatiṣṭhate
vastu pramāṇaṃ tat so 'pi svābhāso 'bhinavodayaḥ
— 'यह ऐसी है'; — इति एवम् — इस प्रकार, इस रूप में; — जिसके वश से; — निश्चित रूप से व्यवस्थित होती है (√स्था+वि-अव, आत्मनेपद); — वस्तु; — वह प्रमाण (है); — वह; — और वह भी; — स्व-आभास, स्वप्रकाश आभास; — नया उदित होने वाला, अभिनवोदय
जिसके वश से वस्तु 'यह ऐसी है' इस प्रकार निश्चित रूप से व्यवस्थित होती है, वह प्रमाण है; और वह भी एक स्वप्रकाश आभास है, जो नया उदित होता है।