Verses on the Recognition of the Lord· 11.2 / 17

Verses on the Recognition of the Lord11.2

11.2
सो ऽन्तस् तथाविमर्शात्मा देशकालाद्यभेदिनि एकाभिधानविषये मितिर् वस्तुन्य् अबाधिता ॥२॥
so 'ntas tathāvimarśātmā deśakālādyabhedini ekābhidhānaviṣaye mitir vastuny abādhitā
— वह (आभास) ; — भीतर, आन्तरिक ; — उस विमर्श-स्वरूप ('यह ऐसी है') ; — देश-काल आदि से अभिन्न (वस्तु) में ; — एक अभिधान (नाम) के विषयभूत (वस्तु) में ; — मिति — प्रमा, ज्ञान ; — वस्तु के विषय में ; — अबाधित, अविरुद्ध (भूत कृदन्त)

वह (आभास), आन्तरिक, 'यह ऐसी है' इस विमर्श-स्वरूप, देश-काल आदि से अभिन्न तथा एक अभिधान (नाम) के विषयभूत वस्तु में अबाधित (अविरुद्ध) मिति (प्रमा) है।