सो ऽन्तस् तथाविमर्शात्मा देशकालाद्यभेदिनि
एकाभिधानविषये मितिर् वस्तुन्य् अबाधिता ॥२॥
so 'ntas tathāvimarśātmā deśakālādyabhedini
ekābhidhānaviṣaye mitir vastuny abādhitā
— वह (आभास); — भीतर, आन्तरिक; — उस विमर्श-स्वरूप ('यह ऐसी है'); — देश-काल आदि से अभिन्न (वस्तु) में; — एक अभिधान (नाम) के विषयभूत (वस्तु) में; — मिति — प्रमा, ज्ञान; — वस्तु के विषय में; — अबाधित, अविरुद्ध (भूत कृदन्त)
वह (आभास), आन्तरिक, 'यह ऐसी है' इस विमर्श-स्वरूप, देश-काल आदि से अभिन्न तथा एक अभिधान (नाम) के विषयभूत वस्तु में अबाधित (अविरुद्ध) मिति (प्रमा) है।