पत्रं पुष्पं फलं तोयं यो मे भक्त्या प्रयच्छति ।
तदहं भक्त्युपहृतमश्नामि प्रयतात्मनः ॥
९-२७ ॥
patraṃ puṣpaṃ phalaṃ toyaṃ yo me bhaktyā prayacchati |
tadahaṃ bhaktyupahṛtamaśnāmi prayatātmanaḥ ||
9-27 ||
जो मुझे भक्ति से पत्र, पुष्प, फल या जल अर्पित करता है, उस शुद्धचित्त वाले के भक्तिपूर्वक अर्पित उस (अर्पण) को मैं ग्रहण करता हूँ।