Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 9.28 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.28

9.28
यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत् । यत्तपस्यसि कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम् ॥ ९-२८ ॥
yatkaroṣi yadaśnāsi yajjuhoṣi dadāsi yat | yattapasyasi kaunteya tatkuruṣva madarpaṇam || 9-28 ||
— तू जो करता है, जो खाता है ; — जो हवन करता है, जो दान देता है ; — जो तप करता है, हे कुन्तीपुत्र ; — उसे मुझे अर्पण करके कर

हे कुन्तीपुत्र, तू जो करता है, जो खाता है, जो हवन करता है, जो दान देता है, और जो तप करता है — उसे मुझे अर्पण करके कर।