Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 9.29 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.29

9.29
शुभाशुभफलैरेवं मोक्ष्यसे कर्मबन्धनैः । संन्यासयोगयुक्तात्मा विमुक्तो मामुपैष्यसि ॥ ९-२९ ॥
śubhāśubhaphalairevaṃ mokṣyase karmabandhanaiḥ | saṃnyāsayogayuktātmā vimukto māmupaiṣyasi || 9-29 ||
— इस प्रकार शुभ-अशुभ फलों से ; — कर्मबन्धनों से मुक्त होगा ; — संन्यासयोग से युक्त आत्मा ; — विमुक्त होकर मुझे प्राप्त होगा

इस प्रकार तू शुभ और अशुभ फल वाले कर्मबन्धनों से मुक्त हो जाएगा; संन्यासयोग से युक्त आत्मा वाला, विमुक्त होकर तू मुझे प्राप्त होगा।