समोऽहं सर्वभूतेषु न मे द्वेष्योऽस्ति न प्रियः ।
ये भजन्ति तु मां भक्त्या मयि ते तेषु चाऽप्यहम् ॥
९-३० ॥
samo'haṃ sarvabhūteṣu na me dveṣyo'sti na priyaḥ |
ye bhajanti tu māṃ bhaktyā mayi te teṣu cā'pyaham ||
9-30 ||
मैं समस्त भूतों में समान हूँ; न मेरा कोई द्वेष्य है, न प्रिय; किन्तु जो भक्ति से मुझे भजते हैं, वे मुझमें हैं और मैं भी उनमें हूँ।