Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 8.23 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)8.23

8.23
यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव योगिनः । प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ ॥ ८-२३ ॥
yatra kāle tvanāvṛttimāvṛttiṃ caiva yoginaḥ | prayātā yānti taṃ kālaṃ vakṣyāmi bharatarṣabha || 8-23 ||
— जिस काल में अनावृत्ति को ; — और आवृत्ति को योगी ; — प्रयाण करके प्राप्त होते हैं, वह काल ; — मैं बताऊँगा, हे भरतर्षभ

हे भरतर्षभ, जिस काल में प्रयाण करने वाले योगी अनावृत्ति (अपुनरागमन) को और जिस काल में आवृत्ति (पुनरागमन) को प्राप्त होते हैं, वह काल मैं बताऊँगा।