यत्र काले त्वनावृत्तिमावृत्तिं चैव योगिनः ।
प्रयाता यान्ति तं कालं वक्ष्यामि भरतर्षभ ॥
८-२३ ॥
yatra kāle tvanāvṛttimāvṛttiṃ caiva yoginaḥ |
prayātā yānti taṃ kālaṃ vakṣyāmi bharatarṣabha ||
8-23 ||
हे भरतर्षभ, जिस काल में प्रयाण करने वाले योगी अनावृत्ति (अपुनरागमन) को और जिस काल में आवृत्ति (पुनरागमन) को प्राप्त होते हैं, वह काल मैं बताऊँगा।