Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 8.11 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)8.11

8.11
यदक्षरं वेदविदो वदन्ति विशन्ति यद्यतयो वीतरागाः । यदिच्छन्तो ब्रह्मचर्यं चरन्ति तत्ते पदं संग्रहेणाभिधास्ये ॥ ८-११ ॥
yadakṣaraṃ vedavido vadanti viśanti yadyatayo vītarāgāḥ | yadicchanto brahmacaryaṃ caranti tatte padaṃ saṃgraheṇābhidhāsye || 8-11 ||
— जिस अक्षर को वेदज्ञ कहते हैं ; — जिसमें वीतराग यति प्रवेश करते हैं ; — जिसकी इच्छा से ब्रह्मचर्य का आचरण करते हैं ; — वह पद तुझे संक्षेप में बताऊँगा

जिस अक्षर को वेद के ज्ञाता कहते हैं, जिसमें वीतराग यति प्रवेश करते हैं, और जिसकी इच्छा से ब्रह्मचर्य का आचरण करते हैं — वह पद मैं तुझे संक्षेप में बताऊँगा।