दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया ।
मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामतितरन्ति ते ॥
७-१४ ॥
daivī hyeṣā guṇamayī mama māyā duratyayā |
māmeva ye prapadyante māyāmatitaranti te ||
7-14 ||
क्योंकि गुणमयी यह मेरी दैवी माया दुस्तर है; किन्तु जो केवल मेरी ही शरण में आते हैं, वे इस माया को पार कर जाते हैं।