Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 7.14 / 30

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)7.14

7.14
दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया । मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामतितरन्ति ते ॥ ७-१४ ॥
daivī hyeṣā guṇamayī mama māyā duratyayā | māmeva ye prapadyante māyāmatitaranti te || 7-14 ||
— क्योंकि गुणमयी यह दैवी ; — मेरी माया दुस्तर ; — जो केवल मेरी ही शरण में आते हैं ; — वे इस माया को पार करते हैं

क्योंकि गुणमयी यह मेरी दैवी माया दुस्तर है; किन्तु जो केवल मेरी ही शरण में आते हैं, वे इस माया को पार कर जाते हैं।