न मां दुष्कृतिनो मूढाः प्रपद्यन्ते नराधमाः ।
माययापहृतज्ञाना आसुरं भावमाश्रिताः ॥
७-१५ ॥
na māṃ duṣkṛtino mūḍhāḥ prapadyante narādhamāḥ |
māyayāpahṛtajñānā āsuraṃ bhāvamāśritāḥ ||
7-15 ||
दुष्कर्म करने वाले, मूढ़, नराधम मेरी शरण में नहीं आते; माया से जिनका ज्ञान अपहृत हो गया है, वे आसुर भाव का आश्रय लेते हैं।