Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 7.16 / 30

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)7.16

7.16
चतुर्विधा भजन्ते मां जनाः सुकृतिनः सदा । आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी ज्ञानी च भरतर्षभ ॥ ७-१६ ॥
caturvidhā bhajante māṃ janāḥ sukṛtinaḥ sadā | ārto jijñāsurarthārthī jñānī ca bharatarṣabha || 7-16 ||
— चार प्रकार के मुझे भजते हैं ; — पुण्यवान् लोग, सदा ; — आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी ; — और ज्ञानी, हे भरतर्षभ

हे भरतर्षभ, चार प्रकार के सुकृती (पुण्यवान्) लोग मुझे सदा भजते हैं — आर्त (दुःखी), जिज्ञासु, अर्थार्थी (धन का इच्छुक), और ज्ञानी।