Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 7.13 / 30

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)7.13

7.13
त्रिभिर्गुणमयैर्भावैरेभिः सर्वमिदं जगत् । मोहितं नाभिजानाति मामेभ्यः परमव्ययम् ॥ ७-१३ ॥
tribhirguṇamayairbhāvairebhiḥ sarvamidaṃ jagat | mohitaṃ nābhijānāti māmebhyaḥ paramavyayam || 7-13 ||
— गुणमय इन तीन भावों से ; — इन से यह समस्त जगत् ; — मोहित होकर नहीं पहचानता ; — मुझे, इनसे परे, अव्यय को

गुणों से बने इन तीन भावों से मोहित यह समस्त जगत् मुझे, जो इनसे परे और अव्यय हूँ, नहीं पहचानता।