प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्विषः ।
अनेकजन्मसंसिद्धस्ततो याति परां गतिम् ॥
६-४७ ॥
prayatnādyatamānastu yogī saṃśuddhakilviṣaḥ |
anekajanmasaṃsiddhastato yāti parāṃ gatim ||
6-47 ||
किन्तु प्रयत्न से यत्न करने वाला, पूर्णतः शुद्ध पापों वाला योगी अनेक जन्मों में संसिद्ध होकर फिर परम गति को प्राप्त करता है।