Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 6.25 / 49

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)6.25

6.25
सङ्कल्पप्रभवान् कामांस्त्यक्त्वा सर्वानशेषतः । मनसैवेन्द्रियग्रामं विनियम्य समन्ततः ॥ ६-२५ ॥
saṅkalpaprabhavān kāmāṃstyaktvā sarvānaśeṣataḥ | manasaivendriyagrāmaṃ viniyamya samantataḥ || 6-25 ||
— संकल्प से उत्पन्न कामनाओं को ; — सब को पूर्णतः त्यागकर ; — मन से ही इन्द्रिय-समूह को ; — सब ओर से नियन्त्रित करके

संकल्प से उत्पन्न समस्त कामनाओं को पूर्णतः त्यागकर, मन के द्वारा ही इन्द्रिय-समूह को सब ओर से नियन्त्रित करके,