Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 6.24 / 49

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)6.24

6.24
तं विद्याद्दुःखसंयोगवियोगं योगसंज्ञितम् । स निश्चयेन योक्तव्यो योगोऽनिर्विण्नचेतसा ॥ ६-२४ ॥
taṃ vidyādduḥkhasaṃyogaviyogaṃ yogasaṃjñitam | sa niścayena yoktavyo yogo'nirviṇnacetasā || 6-24 ||
— उसे दुःख के संयोग से ; — वियोग, योग नामक अवस्था जान ; — उस योग का निश्चय से अभ्यास करे ; — अनुद्विग्न मन से

उसे ही दुःख के संयोग से वियोग रूप वह अवस्था जानो जिसका नाम योग है; उस योग का अभ्यास निश्चय के साथ और अनुद्विग्न मन से करना चाहिए।