तं विद्याद्दुःखसंयोगवियोगं योगसंज्ञितम् ।
स निश्चयेन योक्तव्यो योगोऽनिर्विण्नचेतसा ॥
६-२४ ॥
taṃ vidyādduḥkhasaṃyogaviyogaṃ yogasaṃjñitam |
sa niścayena yoktavyo yogo'nirviṇnacetasā ||
6-24 ||
उसे ही दुःख के संयोग से वियोग रूप वह अवस्था जानो जिसका नाम योग है; उस योग का अभ्यास निश्चय के साथ और अनुद्विग्न मन से करना चाहिए।