Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 6.23 / 49

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)6.23

6.23
यं लब्ध्वा चापरं लाभं मन्यते नाधिकं ततः । यस्मिन् स्थितो न दुःखेन गुरुणापि विचाल्यते ॥ ६-२३ ॥
yaṃ labdhvā cāparaṃ lābhaṃ manyate nādhikaṃ tataḥ | yasmin sthito na duḥkhena guruṇāpi vicālyate || 6-23 ||
— जिसे पाकर अन्य लाभ को ; — उससे बढ़कर नहीं मानता ; — जिसमें स्थित होकर दुःख से ; — भारी दुःख से भी विचलित नहीं होता

जिसे पाकर वह उससे बढ़कर अन्य कोई लाभ नहीं मानता, और जिसमें स्थित होकर वह भारी दुःख से भी विचलित नहीं होता —