Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 6.13 / 49

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)6.13

6.13
तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः । उपविश्यासने युञ्ज्याद्योगमात्मविशुद्धये ॥ ६-१३ ॥
tatraikāgraṃ manaḥ kṛtvā yatacittendriyakriyaḥ | upaviśyāsane yuñjyādyogamātmaviśuddhaye || 6-13 ||
— वहाँ मन को एकाग्र करके ; — मन-इन्द्रियों की क्रिया संयत किए ; — आसन पर बैठकर अभ्यास करे ; — योग का, आत्मा की विशुद्धि के लिए

वहाँ मन को एकाग्र करके, मन और इन्द्रियों की क्रिया को संयत करके, आसन पर बैठकर आत्मा की विशुद्धि के लिए योग का अभ्यास करे।