Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 6.12 / 49

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)6.12

6.12
शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मनः । नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम् ॥ ६-१२ ॥
śucau deśe pratiṣṭhāpya sthiramāsanamātmanaḥ | nātyucchritaṃ nātinīcaṃ cailājinakuśottaram || 6-12 ||
— स्वच्छ स्थान में स्थापित करके ; — अपने लिए स्थिर आसन ; — न अत्यन्त ऊँचा न अत्यन्त नीचा ; — वस्त्र, मृगचर्म और कुश से युक्त

स्वच्छ स्थान में अपने लिए न अत्यन्त ऊँचा न अत्यन्त नीचा, वस्त्र, मृगचर्म और कुश से युक्त स्थिर आसन स्थापित करके,