लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः ।
छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥
५-२५ ॥
labhante brahmanirvāṇamṛṣayaḥ kṣīṇakalmaṣāḥ |
chinnadvaidhā yatātmānaḥ sarvabhūtahite ratāḥ ||
5-25 ||
जिनके पाप क्षीण हो गए, जिनके संशय छिन्न हो गए, जिन्होंने अपने को संयत कर लिया, और जो समस्त भूतों के हित में रत हैं — वे ऋषि ब्रह्मनिर्वाण को प्राप्त करते हैं।