Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 4.2 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)4.2

4.2
एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः । स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप ॥ ४-२ ॥
evaṃ paramparāprāptamimaṃ rājarṣayo viduḥ | sa kāleneha mahatā yogo naṣṭaḥ parantapa || 4-2 ||
— इस प्रकार परम्परा से प्राप्त ; — इसे राजर्षियों ने जाना ; — किन्तु बहुत काल बीतने से ; — योग लुप्त हो गया, हे परन्तप

इस प्रकार परम्परा से प्राप्त इस योग को राजर्षियों ने जाना; किन्तु हे परन्तप, बहुत काल बीत जाने से वह योग इस लोक में लुप्त हो गया।