Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 4.3 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)4.3

4.3
स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः । भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम् ॥ ४-३ ॥
sa evāyaṃ mayā te'dya yogaḥ proktaḥ purātanaḥ | bhakto'si me sakhā ceti rahasyaṃ hyetaduttamam || 4-3 ||
— वही यह आज मैंने तुझसे ; — पुरातन योग कहा है ; — क्योंकि तू मेरा भक्त और सखा है ; — क्योंकि यह परम रहस्य है

वही यह पुरातन योग आज मैंने तुझसे कहा है, क्योंकि तू मेरा भक्त और सखा है; यह तो परम रहस्य है।