Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.8 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.8

3.8
नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः । शरीरयात्रापि च ते न प्रसिद्ध्येदकर्मणः ॥ ३-८ ॥
niyataṃ kuru karma tvaṃ karma jyāyo hyakarmaṇaḥ | śarīrayātrāpi ca te na prasiddhyedakarmaṇaḥ || 3-8 ||
— तू नियत कर्म कर ; — कर्म अकर्म से श्रेष्ठ है ; — और तेरी शरीर-यात्रा भी ; — अकर्म से सिद्ध नहीं होगी

तुम नियत कर्म करो, क्योंकि कर्म अकर्म से श्रेष्ठ है; अकर्म से तो तुम्हारी शरीर-यात्रा भी सिद्ध नहीं होगी।