Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.18 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.18

3.18
नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन । न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयः ॥ ३-१८ ॥
naiva tasya kṛtenārtho nākṛteneha kaścana | na cāsya sarvabhūteṣu kaścidarthavyapāśrayaḥ || 3-18 ||
— न उसका किए हुए से कोई प्रयोजन ; — न इस लोक में न किए हुए से कुछ ; — और न समस्त भूतों में ; — किसी पर वह प्रयोजन के लिए आश्रित

इस लोक में न उसका किए हुए कर्म से कोई प्रयोजन है, न न किए हुए से कुछ; और न समस्त भूतों में किसी पर वह अपने प्रयोजन के लिए आश्रित रहता है।