नैव तस्य कृतेनार्थो नाकृतेनेह कश्चन ।
न चास्य सर्वभूतेषु कश्चिदर्थव्यपाश्रयः ॥
३-१८ ॥
naiva tasya kṛtenārtho nākṛteneha kaścana |
na cāsya sarvabhūteṣu kaścidarthavyapāśrayaḥ ||
3-18 ||
इस लोक में न उसका किए हुए कर्म से कोई प्रयोजन है, न न किए हुए से कुछ; और न समस्त भूतों में किसी पर वह अपने प्रयोजन के लिए आश्रित रहता है।