Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.9 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.9

2.9
एवमुक्त्वा हृषीकेशं गुडाकेशः परन्तप । न योत्स्यानिति गोविन्दमुक्त्वा तूष्णीं बभूव ह ॥ २-९ ॥
evamuktvā hṛṣīkeśaṃ guḍākeśaḥ parantapa | na yotsyāniti govindamuktvā tūṣṇīṃ babhūva ha || 2-9 ||
— हृषीकेश से ऐसा कहकर ; — गुडाकेश (अर्जुन) ; — हे परन्तप (धृतराष्ट्र) ; — 'मैं युद्ध नहीं करूँगा' ऐसा ; — गोविन्द से कहकर ; — मौन हो गया

हे परन्तप, हृषीकेश से इस प्रकार कहकर गुडाकेश (अर्जुन) ने गोविन्द से 'मैं युद्ध नहीं करूँगा' ऐसा कहकर मौन धारण कर लिया।