Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.10 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.10

2.10
तमुवाच हृषीकेशः प्रहसन्निव भारत । सेनयोरुभयोर्मध्ये सीदमानमिदं वचः ॥ २-१० ॥
tamuvāca hṛṣīkeśaḥ prahasanniva bhārata | senayorubhayormadhye sīdamānamidaṃ vacaḥ || 2-10 ||
— उस (अर्जुन) से हृषीकेश ने कहा ; — मानो हँसते हुए ; — हे भारत ; — दोनों सेनाओं के बीच ; — विषाद करते हुए उससे ; — यह वचन

हे भारत, दोनों सेनाओं के बीच विषाद करते हुए उस (अर्जुन) से हृषीकेश ने मानो हँसते हुए यह वचन कहा —