Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.6 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.6

2.6
नैतद्विद्मः कतरन्नो गरीयो यद्वा जयेम यदि वा नो जयेयुः । यानेव हत्वा न जिजीविषाम- स्ते नः स्थिताः प्रमुखे धार्तराष्ट्राः ॥ २-६ ॥
naitadvidmaḥ kataranno garīyo yadvā jayema yadi vā no jayeyuḥ | yāneva hatvā na jijīviṣāma- ste naḥ sthitāḥ pramukhe dhārtarāṣṭrāḥ || 2-6 ||
— हम यह नहीं जानते ; — हमारे लिए कौन-सा अधिक श्रेष्ठ ; — कि हम जीतें या वे हमें जीतें ; — जिन्हें मारकर हम जीना न चाहेंगे ; — वे ही धृतराष्ट्रपुत्र हमारे सामने खड़े हैं

हम यह भी नहीं जानते कि हमारे लिए कौन-सा अधिक श्रेष्ठ है — कि हम इन्हें जीतें अथवा वे हमें जीतें; जिन्हें मारकर हम जीना भी न चाहेंगे, वे ही धृतराष्ट्रपुत्र हमारे सामने खड़े हैं।