बुद्धियुक्तो जहातीह उभे सुकृतदुष्कृते ।
तस्माद्योगाय युज्यस्व योगः कर्मसु कौशलम् ॥
२-५२ ॥
buddhiyukto jahātīha ubhe sukṛtaduṣkṛte |
tasmādyogāya yujyasva yogaḥ karmasu kauśalam ||
2-52 ||
बुद्धियोग से युक्त पुरुष इस लोक में पुण्य और पाप दोनों को त्याग देता है; अतः योग के लिए अपने को जोड़ो — कर्मों में कुशलता ही योग है।