Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.53 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.53

2.53
कर्मजं बुद्धियुक्ता हि फलं त्यक्त्वा मनीषिणः । जन्मबन्धविनिर्मुक्ताः पदं गच्छन्त्यनामयम् ॥ २-५३ ॥
karmajaṃ buddhiyuktā hi phalaṃ tyaktvā manīṣiṇaḥ | janmabandhavinirmuktāḥ padaṃ gacchantyanāmayam || 2-53 ||
— क्योंकि बुद्धि से युक्त ; — फल को त्यागकर मनीषी ; — जन्म के बन्धन से मुक्त ; — निरामय (अनामय) पद को प्राप्त करते हैं

क्योंकि बुद्धि से युक्त मनीषी जन कर्मजनित फल को त्यागकर जन्म के बन्धन से मुक्त होकर निरामय (अनामय) पद को प्राप्त करते हैं।