Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.31 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.31

2.31
देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत । तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि ॥ २-३१ ॥
dehī nityamavadhyo'yaṃ dehe sarvasya bhārata | tasmātsarvāṇi bhūtāni na tvaṃ śocitumarhasi || 2-31 ||
— यह देही नित्य अवध्य है ; — सबके शरीर में ; — हे भारत ; — अतः समस्त भूतों के लिए ; — तुझे शोक करना उचित नहीं

हे भारत, सबके शरीर में यह देही (आत्मा) सदा अवध्य है; अतः समस्त भूतों के लिए तुम्हें शोक करना उचित नहीं।