देही नित्यमवध्योऽयं देहे सर्वस्य भारत ।
तस्मात्सर्वाणि भूतानि न त्वं शोचितुमर्हसि ॥
२-३१ ॥
dehī nityamavadhyo'yaṃ dehe sarvasya bhārata |
tasmātsarvāṇi bhūtāni na tvaṃ śocitumarhasi ||
2-31 ||
हे भारत, सबके शरीर में यह देही (आत्मा) सदा अवध्य है; अतः समस्त भूतों के लिए तुम्हें शोक करना उचित नहीं।