Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.1 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.1

2.1
तं तथा कृपयाविष्टमश्रुपूर्णाकुलेक्षणम् । विषीदन्तमिदं वाक्यमुवाच मधुसूदनः ॥ २-१ ॥
taṃ tathā kṛpayāviṣṭamaśrupūrṇākulekṣaṇam | viṣīdantamidaṃ vākyamuvāca madhusūdanaḥ || 2-1 ||
— उस (अर्जुन) से, उस प्रकार ; — करुणा से अभिभूत को ; — आँसुओं से भरे व्याकुल नेत्रों वाले को ; — विषाद करते हुए को ; — यह वचन कहा ; — मधुसूदन (कृष्ण) ने

इस प्रकार करुणा से अभिभूत, आँसुओं से भरे व्याकुल नेत्रों वाले और विषाद में डूबे हुए उस (अर्जुन) से मधुसूदन ने यह वचन कहा —