Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 16.22 / 24

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)16.22

16.22
एतैर्वियुक्तः कौन्तेय तमोद्वारैस्त्रिभिर्नरः । आचरत्यात्मनः श्रेयस्ततो याति परां गतिम् ॥ १६-२२ ॥
etairviyuktaḥ kaunteya tamodvāraistribhirnaraḥ | ācaratyātmanaḥ śreyastato yāti parāṃ gatim || 16-22 ||
— इनसे मुक्त, हे कुन्तीपुत्र ; — अन्धकार के इन तीन द्वारों से, मनुष्य ; — अपने लिए श्रेय का आचरण करता है ; — इससे परम गति को जाता है

हे कुन्तीपुत्र, अन्धकार के इन तीन द्वारों से मुक्त मनुष्य अपने लिए श्रेय का आचरण करता है, और इससे परम गति को प्राप्त होता है।