Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 16.23 / 24

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)16.23

16.23
यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारतः । न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परां गतिम् ॥ १६-२३ ॥
yaḥ śāstravidhimutsṛjya vartate kāmakārataḥ | na sa siddhimavāpnoti na sukhaṃ na parāṃ gatim || 16-23 ||
— जो शास्त्र-विधि को त्यागकर ; — काम के वश में बरतता है ; — वह न सिद्धि को प्राप्त होता ; — न सुख, न परम गति

जो शास्त्र-विधि को त्यागकर काम के वश में होकर बरतता है, वह न सिद्धि को प्राप्त होता है, न सुख को, और न परम गति को।