यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारतः ।
न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परां गतिम् ॥
१६-२३ ॥
yaḥ śāstravidhimutsṛjya vartate kāmakārataḥ |
na sa siddhimavāpnoti na sukhaṃ na parāṃ gatim ||
16-23 ||
जो शास्त्र-विधि को त्यागकर काम के वश में होकर बरतता है, वह न सिद्धि को प्राप्त होता है, न सुख को, और न परम गति को।