Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 16.21 / 24

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)16.21

16.21
त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः । कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत् ॥ १६-२१ ॥
trividhaṃ narakasyedaṃ dvāraṃ nāśanamātmanaḥ | kāmaḥ krodhastathā lobhastasmādetattrayaṃ tyajet || 16-21 ||
— यह नरक का त्रिविध द्वार ; — आत्मा का नाश करने वाला ; — काम, क्रोध, तथा लोभ ; — अतः इन तीनों को त्याग देना चाहिए

यह नरक का त्रिविध द्वार, आत्मा का नाश करने वाला है — काम, क्रोध और लोभ; अतः इन तीनों को त्याग देना चाहिए।