Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 14.18 / 27

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)14.18

14.18
ऊर्ध्वं गच्छन्ति सत्त्वस्था मध्ये तिष्ठन्ति राजसाः । जघन्यगुणवृत्तिस्था अधो गछन्ति तामसाः ॥ १४-१८ ॥
ūrdhvaṃ gacchanti sattvasthā madhye tiṣṭhanti rājasāḥ | jaghanyaguṇavṛttisthā adho gachanti tāmasāḥ || 14-18 ||
— सत्त्व में स्थित ऊपर जाते हैं ; — राजस मध्य में रहते हैं ; — निकृष्ट गुण की वृत्ति में स्थित ; — तामस नीचे जाते हैं

सत्त्व में स्थित लोग ऊपर जाते हैं, राजस लोग मध्य में रहते हैं; और निकृष्ट गुण की वृत्ति में स्थित तामस लोग नीचे जाते हैं।