Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.15 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.15

11.15
पश्यामि देवांस्तव देव देहे सर्वांस्तथा भूतविशेषसङ्घान् । ब्रह्माणमीशं कमलासनस्थ मृषींश्च सर्वानुरगांश्च दिव्यान् ॥ ११-१५ ॥
paśyāmi devāṃstava deva dehe sarvāṃstathā bhūtaviśeṣasaṅghān | brahmāṇamīśaṃ kamalāsanastha mṛṣīṃśca sarvānuragāṃśca divyān || 11-15 ||
— हे देव, मैं देवताओं को आपके शरीर में देखता हूँ ; — सबको, और भूतों के नाना समूहों को ; — कमल के आसन पर स्थित ईश ब्रह्मा को ; — और समस्त ऋषियों को और दिव्य नागों को

हे देव, मैं आपके शरीर में समस्त देवताओं को, और वैसे ही भूतों के नाना प्रकार के समूहों को, कमल के आसन पर स्थित ईश ब्रह्मा को, समस्त ऋषियों को और दिव्य नागों को देखता हूँ।