Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.14 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.14

11.14
ततः स विस्मयाविष्टो हृष्टरोमा धनञ्जयः । प्रणम्य शिरसा देवं कृताञ्जलिरभाषत ॥ ११-१४ ॥
tataḥ sa vismayāviṣṭo hṛṣṭaromā dhanañjayaḥ | praṇamya śirasā devaṃ kṛtāñjalirabhāṣata || 11-14 ||
— तब वह विस्मय से युक्त ; — रोमाञ्चित धनञ्जय ; — देव को सिर से प्रणाम करके ; — हाथ जोड़कर बोला

तब विस्मय से युक्त, रोमाञ्चित धनञ्जय ने देव को सिर से प्रणाम करके, हाथ जोड़कर कहा —