Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 1.7 / 47

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)1.7

1.7
अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम । नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान् ब्रवीमि ते ॥ १-७ ॥
asmākaṃ tu viśiṣṭā ye tānnibodha dvijottama | nāyakā mama sainyasya saṃjñārthaṃ tān bravīmi te || 1-7 ||
— हमारे पक्ष में ; — किन्तु ; — विशिष्ट जन ; — जो ; — उन्हें जान लीजिए ; — हे द्विजश्रेष्ठ ; — नायक ; — मेरी सेना के ; — पहचान के लिए ; — उन्हें मैं आपको बताता हूँ

हे द्विजश्रेष्ठ, हमारे पक्ष में भी जो विशिष्ट हैं — मेरी सेना के नायक — उन्हें भी जान लीजिए; पहचान के लिए मैं उनके नाम आपको बताता हूँ।