Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 1.3 / 47

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)1.3

1.3
पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम् । व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ॥ १-३ ॥
paśyaitāṃ pāṇḍuputrāṇāmācārya mahatīṃ camūm | vyūḍhāṃ drupadaputreṇa tava śiṣyeṇa dhīmatā || 1-3 ||
— देखिए ; — इस ; — पाण्डुपुत्रों की ; — हे आचार्य ; — विशाल सेना को ; — व्यूहबद्ध ; — द्रुपदपुत्र (धृष्टद्युम्न) के द्वारा ; — आपके शिष्य के द्वारा ; — बुद्धिमान् के द्वारा

हे आचार्य, पाण्डुपुत्रों की इस विशाल सेना को देखिए, जिसे आपके बुद्धिमान् शिष्य द्रुपदपुत्र (धृष्टद्युम्न) ने व्यूहबद्ध किया है।