Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 1.24 / 47

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)1.24

1.24
एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत ! । सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम् ॥ १-२४ ॥
evamukto hṛṣīkeśo guḍākeśena bhārata ! | senayorubhayormadhye sthāpayitvā rathottamam || 1-24 ||
— इस प्रकार कहे जाने पर ; — हृषीकेश (कृष्ण) ; — गुडाकेश (निद्राजयी अर्जुन) के द्वारा ; — हे भारत ; — दोनों सेनाओं के बीच ; — श्रेष्ठ रथ को खड़ा करके

हे भारत (धृतराष्ट्र), गुडाकेश (अर्जुन) के इस प्रकार कहने पर हृषीकेश ने उस श्रेष्ठ रथ को दोनों सेनाओं के बीच खड़ा करके,