The Great Liberation Tantra· 3.63 / 153

The Great Liberation Tantra3.63

3.63
तदेकं स्मरामस्तदेकं जपामः तदेकं जगत्साक्षिरूपं नमामः । सदेकं निधानं निरालम्बमीशं भवाम्भोधिपोतं शरण्यं व्रजामः ॥६३॥
tadekaṃ smarāmastadekaṃ japāmaḥ tadekaṃ jagatsākṣirūpaṃ namāmaḥ | sadekaṃ nidhānaṃ nirālambamīśaṃ bhavāmbhodhipotaṃ śaraṇyaṃ vrajāmaḥ ||63||
— उस एक का ; — स्मरण करते हैं ; — उस एक का ; — जप करते हैं ; — उस एक को ; — जगत् के साक्षी-रूप को ; — नमस्कार करते हैं ; — उस एक सत् को ; — निधान को ; — निरालम्ब ; — ईश को ; — भव-समुद्र की नौका को ; — शरण्य को ; — शरण लेते हैं

उस एक का हम स्मरण करते हैं, उस एक का जप करते हैं, उस एक को — जगत् के साक्षी-रूप को — नमस्कार करते हैं; उस एक सत्, निधान, निरालम्ब ईश, भव-समुद्र की नौका, शरण्य की हम शरण लेते हैं।