The Great Liberation Tantra· 3.61 / 153

The Great Liberation Tantra3.61

3.61
भयानां भयं भीषणं भीषणानां गतिः प्राणिनां पावनं पावनानाम् । महोच्चैःपदानां नियन्तृ त्वमेकं परेषां परं रक्षकं रक्षकाणाम् ॥६१॥
bhayānāṃ bhayaṃ bhīṣaṇaṃ bhīṣaṇānāṃ gatiḥ prāṇināṃ pāvanaṃ pāvanānām | mahoccaiḥpadānāṃ niyantṛ tvamekaṃ pareṣāṃ paraṃ rakṣakaṃ rakṣakāṇām ||61||
— भयों के ; — भय ; — भीषण ; — भीषणों के ; — गति, शरण ; — प्राणियों की ; — पावन ; — पावनों के ; — महान् उच्च पदों के ; — नियन्ता ; — तुम ; — एक ; — परों के ; — पर ; — रक्षक ; — रक्षकों के

तुम भयों के भय हो, भीषणों के भीषण, प्राणियों की गति, पावनों के पावन; तुम एक ही महान् उच्च पदों के नियन्ता, परों के पर, और रक्षकों के रक्षक हो।