The Great Liberation Tantra· 3.60 / 153

The Great Liberation Tantra3.60

3.60
त्वमेकं जगत्कर्तृपातृप्रहर्तृ त्वमेकं परं निश्चलं निर्विकल्पम् ॥६०॥
tvamekaṃ jagatkartṛpātṛprahartṛ tvamekaṃ paraṃ niścalaṃ nirvikalpam ||60||
— तुम ; — एक ; — जगत् के कर्ता, पाता और संहर्ता ; — तुम ; — एक ; — परम ; — निश्चल ; — निर्विकल्प

तुम एक ही जगत् के कर्ता, पाता और संहर्ता हो; तुम एक ही परम, निश्चल, निर्विकल्प हो।