त्वमेकं जगत्कर्तृपातृप्रहर्तृ त्वमेकं परं निश्चलं निर्विकल्पम् ॥६०॥
tvamekaṃ jagatkartṛpātṛprahartṛ tvamekaṃ paraṃ niścalaṃ nirvikalpam ||60||
तुम एक ही जगत् के कर्ता, पाता और संहर्ता हो; तुम एक ही परम, निश्चल, निर्विकल्प हो।
तुम एक ही जगत् के कर्ता, पाता और संहर्ता हो; तुम एक ही परम, निश्चल, निर्विकल्प हो।