The Great Liberation Tantra· 3.59 / 153

The Great Liberation Tantra3.59

3.59
नमस्ते सते सर्वलोकाश्रयाय नमस्ते चिते विश्वरूपात्मकाय । नमोऽद्वैततत्त्वाय मुक्तिप्रदाय नमो ब्रह्मणे व्यापिने निर्गुणाय ॥५९॥
namaste sate sarvalokāśrayāya namaste cite viśvarūpātmakāya | namo'dvaitatattvāya muktipradāya namo brahmaṇe vyāpine nirguṇāya ||59||
— आपको नमस्कार ; — सत् को ; — समस्त लोकों के आश्रय को ; — आपको नमस्कार ; — चित् को ; — विश्व-रूपात्मक को ; — नमस्कार ; — अद्वैत तत्त्व को ; — मुक्ति देने वाले को ; — नमस्कार ; — ब्रह्म को ; — व्यापक को ; — निर्गुण को

आपको नमस्कार, हे सत्, समस्त लोकों के आश्रय; आपको नमस्कार, हे चित्, विश्व-रूपात्मक; नमस्कार उस अद्वैत तत्त्व को, मुक्ति देने वाले; नमस्कार ब्रह्म को, व्यापक, निर्गुण को।