The Great Liberation Tantra3.58
स्तोत्रं शृणु महेशानि ब्रह्मणः परमात्मनः ।
यत् श्रुत्वा साधको देवि ब्रह्मसायुज्यमश्नुते ॥५८॥
stotraṃ śṛṇu maheśāni brahmaṇaḥ paramātmanaḥ |
yat śrutvā sādhako devi brahmasāyujyamaśnute ||58||
— स्तोत्र को ; — सुनो ; — हे महेशानि ; — ब्रह्म का ; — परमात्मा का ; — जिसे ; — सुनकर ; — साधक ; — हे देवि ; — ब्रह्म-सायुज्य को ; — प्राप्त करता है हे महेशानि, ब्रह्म — परमात्मा — का स्तोत्र सुनो, जिसे सुनकर हे देवि, साधक ब्रह्म-सायुज्य को प्राप्त करता है।