The Essence of the Tantra· 9.45 / 53

The Essence of the Tantra9.45

9.45

यदा तु तत्रैव अधिष्ठातृरूपतया बीजात्मतयैव भानं तदा सुषुप्तावस्था

Transliteration (IAST)

yadā tu tatraiva adhiṣṭhātṛrūpatayā bījātmatayaiva bhānaṃ tadā suṣuptāvasthā

— अधिष्ठातृ-रूप से (शासक रूप से) ; — बीज-आत्मता से ही (बीज-स्वरूप से) ; — भान — प्रतीति ; — सुषुप्ति-अवस्था

किन्तु जब उसी (त्रितय) में अधिष्ठातृ-रूप से, बीज-आत्मता से ही भान होता है, तब सुषुप्ति-अवस्था (होती है)।