धरातत्त्वसिद्धिप्रदान् प्रेरयति स धरामन्त्रमहेश्वरः प्रेर्यो धरामन्त्रेशः तस्यैवाभिमानिकविग्रहतात्मको वाचको मन्त्रः साङ्ख्यादिपाशवविद्योत्तीर्णशिवविद्याक्रमेण अभ्यस्तपार्थिवयोगो ऽप्राप्तध्रुवपदः धराविज्ञानाकलः
Transliteration (IAST)
dharātattvasiddhipradān prerayati sa dharāmantramaheśvaraḥ preryo dharāmantreśaḥ tasyaivābhimānikavigrahatātmako vācako mantraḥ sāṅkhyādipāśavavidyottīrṇaśivavidyākrameṇa abhyastapārthivayogo 'prāptadhruvapadaḥ dharāvijñānākalaḥ
धरा-तत्त्व की सिद्धि प्रदान करने वालों को जो प्रेरित करता है, वह धरा-मन्त्रमहेश्वर है; प्रेर्य (प्रेरित) धरा-मन्त्रेश है; उसी की अभिमानिक विग्रहता-आत्मक वाचक मन्त्र है। जो सांख्य आदि पाशव-विद्या से उत्तीर्ण शिव-विद्या के क्रम से पार्थिव योग का अभ्यास किये हुए है किन्तु ध्रुव-पद को प्राप्त नहीं हुआ, वह धरा-विज्ञानाकल है।